मध्य प्रदेश जनवरी गतिविधि – सूचना का अधिकार

  1. विद्यार्थियों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की प्रक्रिया और आवेदन से परिचित कराया जाएगा।
  2. कौशल संघ भावना (टीम स्पिरिट), विश्लेषणात्मक कौशल (एनालिटिकल स्किल) और कम्युनिकेशन कौशल 

क्रमांक  सत्र विवरण  अनुमानित  समय 
1  गतिविधि दिवस 

चरण 1- परिचय/प्रस्तावना  

चरण 2 – सुचना का अधिकार कहानी वितरण 

चरण 3- समूह चर्चा 

चरण 4 - प्रस्तुति 

चरण 5- वाद-विवाद और गृहकार्य 

चरण 6 – रिफ्लेकशन शीट और फीडबैक फ़ार्म 

45 मिनट 

 

गतिविधि के दिन                                                                                                                                                                               चरण 1 - परिचय 

सत्र का परिचय देने के लिए, दी गई समाचार की कटिंग को पढ़ें। विद्यार्थियों को समाचार-पत्र के अंश को ध्यान से सुनने को कहें। 

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी की एम.एड. कर रही एक विद्यार्थी हवानूर बीबी जानना चाहती थी कि उसकी मार्कशीट असली है या नहीं। फर्जी मार्कशीट का घोटाला इतना वास्तविक है कि यह माहिर और अनुभवी व्यक्ति के मन में भी डर पैदा करता हैहवानूर बीबी ने 2014 में एम.एड. उत्तीर्ण किया और उसकी मार्कशीट की वास्तविकता के सम्बन्ध में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय आरटीआई दायर किया।

मार्कशीट वेरिफिकेशन के लिए उसने ऑनलाइन आरटीआई का रुख किया। उसने मार्कशीट की प्रमाणित प्रति प्राप्त की, आरटीआई टीम की तुरंत प्रतिक्रिया से वह बहुत खुश थी।

संदर्भ- आरटीआई क्या कर सकता है? सूचना की शक्ति साबित करने वाली 5 कहानियां ! (thebetterindia.com) 

आज हम अधिकारियों से कहते हैं कि अगर उन्होंने हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो हम एक आरटीआई दायर करेंगे.' अधिकारी द्वारा नया राशन कार्ड जारी करने के लिए 150 रुपये की रिश्वत मांगने के बाद उसे आरटीआई दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। मैंने एक साल तक इंतजार किया और आखिरकार जब मैंने एक आरटीआई दायर की, तो मुझे यह तीन सप्ताह के भीतर मिल गया। सरपंच ने व्यक्तिगत रूप से इसे मेरे घर पर पहुंचाया, ”अर्चना भाग्यवंत ने कहा।

संदर्भ- http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/4586278.cms?utm_source=contentofintrest&utm_medium=text&utm_campaign=cppst 

समाचार कटिंग को पढ़ने के बाद नीचे दिए गए निम्न प्रश्न पूछें- 

  • कहानियों में क्या मुद्दे हैं?
  • मुद्दे को सुलझाने में किस बात ने उनकी मदद की?
  • क्या किसी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के बारे में सुना है?

 

आज के सत्र में हम इस मौलिक अधिकार यानी सूचना के अधिकार के बारे में विभिन्न कहानियों के माध्यम से और जानेंगे। -

चरण 2- ‘सूचना का अधिकार’ कहानी का वितरण

  1. विद्यार्थियों को 3 समूहों में विभाजित करें।
  2. प्रत्येक समूह को एक कहानी बांटें।

कहानी - 1

14 साल का चिंटू अखबार पढ़ रहा था। उड़ीसा के ग्रामीण गांव के एक निवासी के बारे में एक खबर थी कि उसने सरकार की योजना के तहत अपने गांव में बनाए गए तालाबों की संख्या की जानकारी के लिए एक आरटीआई आवेदन दायर किया था। उन्हें जो जानकारी मिली उसमें यह खुलासा था कि पैसा खर्च करने के बावजूद तालाबों का कभी निर्माण नहीं किया गया था। यह सब होने पर, स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। चिंटू इस खबर को पढ़कर इतना चकित हुआ कि वह तुरंत इस ‘आरटीआई’ आवेदन के बारे में और पूछने के लिए अपने दादा-दादी को खोजने लगा। 

उसके दादा ने कहा, “चिंटू, ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) अधिनियम 2005, नागरिकों के याचिका/अनुरोधों पर सरकार से संबंधित जानकारी को लेकर समय पर प्रतिक्रिया देना अनिवार्य करता है। तुम सोच रहे होंगे कि सरकार ऐसा क्यों करे? खैर, चूंकि प्रत्येक नागरिक कर(टैक्स) चुकाता है, इसलिए उसे यह जानने का अधिकार है कि सरकार कैसे काम कर रही है। अधिनियम प्रत्येक नागरिक को सरकार से कोई भी जानकारी प्राप्त करने, किसी भी सरकारी दस्तावेज की प्रतियां प्राप्त करने, किसी भी सरकारी दस्तावेज, कार्य और रिकॉर्ड का निरीक्षण करने और किसी भी सरकारी कार्य की सामग्री के प्रमाणित नमूने लेने का अधिकार देता है।

लेकिन सारी जानकारी नहीं मिल पाती, उसकी दादी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती है। उदाहरण के लिए, आंतरिक सुरक्षा से संबंधित जानकारी, विदेशों के साथ संबंध, बौद्धिक संपदा अधिकार(IPR), कैबिनेट चर्चा, भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाली जानकारी को आरटीआई  से छूट दी गई है।

चिंटू ने कहा हाँ, हम अपने देश की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते। लेकिन इस अधिनियम का उपयोग हमारे द्वारा भ्रष्टाचार, सरकारी कार्य में प्रगति, व्यय संबंधी जानकारी आदि को उजागर करने के लिए किया जा सकता है। मुझे नहीं पता था कि हमारे पास इतना अधिकार है।

चिंटू के दादाजी कहते हैं, कि सूचित/जागरूक नागरिकों के बिना कोई लोकतंत्र नहीं है। अधिनियम बेहतर जागरूक नागरिकों के निर्माण की परिकल्पना करता है जो सरकारी तंत्र के कामकाज के बारे में आवश्यक निगरानी रखेंगे, इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि भारत में सूचना का अधिकार लोकतंत्र की पहचान है।

दादाजी चिंटू से कहते हैं कि उसने सूचना का अधिकार अधिनियम के बारे में उनसे जो भी कुछ सीखा और समझा है वह उसे सूचीबद्ध तरीके से क्यों नहीं लिखता है! उन्होंने उसे कम से कम अपने दो दोस्तों के साथ साझा करने के लिए भी कहा।

नोट: विद्यार्थी इस बारे में चर्चा करेंगे- सूचना का अधिकार का उद्देश्य और लाभ क्या है?

कहानी - 2

मीना और उसके माता-पिता हाल ही में एक पार्टी से लौटे थे। मीना ने देखा था कि हर कोई उनके पिता का सम्मान कर रहा था क्योंकि वह एक आरटीआई अधिकारी थे। मीना यह जानने के लिए बहुत उत्सुक थीं कि आरटीआई किस तरह के मुद्दों को संभालती है, जो इस तरह की छाप उत्पन्न करते है।  वह इसके बारे में जानने के लिए अपने पिता के पास जाती है। उसके पिता कमला मोइरांगथीम की एक कहानी सुनाते हैं। वह मणिपुर के उचेकों टाखोक गांव की रहने वाली हैं और उन्होंने इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) के लिए आवेदन किया था। उसे नहीं पता था कि उसने लाभार्थियों की सूची में जगह बनाई है या नहीं। कमला के दोस्त ने इंदिरा आवास योजना के तहत लाभार्थियों की सूची की जानकारी मांगने के लिए एक आरटीआई आवेदन दायर किया। जानकारी से पता चला कि कमला को लाभार्थियों में से एक के रूप में चुना गया था। जब कमला ने अपनी ग्राम पंचायत के प्रधान से अपने घर के लिए पैसे की मांग की, तो उन्होंने कहा कि उसे घर बनाने के लिए 18,000 रुपये दिए जाएंगे। यह जानते हुए कि वह 35,000 रुपये की हकदार थी, कमला ने न्याय के लिए लड़ाई लड़ी और अपना पैसा प्राप्त किया। उसके गाँव में हर कोई अब कमला को अपना आदर्श मानता है।

मीना के पिता ने कहा कि सरकार से संबंधित किसी भी प्रकार के मुद्दों के बारे में आरटीआई के माध्यम से पूछताछ की जा सकती है, मैं तुम्हें एक और उदाहरण से बताता हूं, उन्होंने बताया, बागेपल्ली, बेंगलुरू से 100 किलो मीटर उत्तर में एक छोटा सा शहर है, जहां वृक्षों की कतारें, पक्की सड़कें हैं। लेकिन, सरकारी अधिकारियों का सोचना था बागेपल्ली सड़कों के चौड़ीकरण और स्ट्रीटलाइट से बेहतर होगा। मार्च 2005 में सड़क का काम शुरू हुआ। काम का अंकन अव्यवसायिक रूप से किया गया; सड़कों के बनने से पहले ही डिवाइडर बना दिए गए थे, जिससे यातायात अव्यवस्थित हो गया था, जिसके कारण कई दुर्घटनाएँ और मौतें हुईं। एडीएटीएस (एक एनजीओ) के एक कर्मचारी तौफीक ने बागेपल्ली की सड़कों की वास्तविक कहानी का पता लगाने के लिए आरटीआई का इस्तेमाल किया। उनका कहना है, 'सड़क के लिए करीब 1.32 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। मेरे आरटीआई आवेदन के जवाब में इस 1.32 करोड़ में से 1.15 करोड़ को खर्च के रूप में दिखाया गया था। अंत में हमने हमारे पास मौजूद जानकारी के साथ जूनियर इंजीनियर का विरोध  किया, उसने माफी मांगी और सड़क को ठीक करने का वादा किया। आरटीआई की बदौलत सड़क का काम आखिरकार पूरा हो रहा है।

ये कुछ तरीके हैं जिनसे आरटीआई ने देश के नागरिकों की मदद की है, मीना। यह अच्छा होगा यदि तुम इस बारे में अधिक शोध करो कि आरटीआई की मदद से किन अन्य मुद्दों का समाधान किया जा सकता है। मीना ने जानकारी के लिए अपने पिता को धन्यवाद दिया और उनसे कहा कि वह अन्य मुद्दों के बारे में भी पता लगाएगी। इसके अलावा, अगर इस तरह के किसी भी मुद्दों से भविष्य में उसके दोस्तों का सामना होता है तो उसके समाधान के लिए वह उनको आरटीआई आवेदन दायर करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। 

नोट: विद्यार्थी इस बारे में चर्चा करेंगे- सूचना का अधिकारके माध्यम से किस प्रकार के मुद्दों से निपटा जा सकता है और किस प्रकार के परिणाम मिल सकते है ? 

कहानी - 3

यह लक्कराजू प्रशांत की कहानी है। वह चेन्नई से हैदराबाद चला गया। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ 2015-16 के दौरान आजीवन रोड टैक्स रिफंड के लिए तांबरम, चेन्नई में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में आवेदन किया था। उन्होंने कई हफ्तों तक इंतजार किया लेकिन आरटीओ ऑफिस से उन्हें कोई सूचना या अपडेट नहीं मिली। धीमे काम से निराश और तंग आकर उन्होंने आरटीओ सूचना का अधिकार अधिनियम की ओर रुख किया।

लक्काराजू प्रशांत का कहना है कि आरटीआई आवेदन जमा करना बेहद आसान है, इसके 3 तरीके हैं- ऑनलाइन, पोस्ट और व्यक्तिगत रूप से और इसकी कीमत सिर्फ 10 रुपये है। उन्होंने ऑनलाइन आरटीआई फॉर्म की सभी औपचारिकताओं को पूरा किया, फीस का भुगतान किया और अपना आवेदन जमा किया। एक बार जब आरटीआई ने उनकी ओर से आरटीओ कार्यालय को आवेदन भेजा, तो उन्हें क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से तुरंत प्रतिक्रिया मिली।

आरटीआई के तहत उनके आवेदन के परिणामस्वरूप उन्हें अपने रोड टैक्स रिफंड की स्थिति के बारे में अपडेट दिया गया और एक सप्ताह के भीतर अनुरोधित दस्तावेजों और अधिकारियों के नामों के साथ उनका पैसा प्राप्त हुआ।

नोट: विद्यार्थी इस बारे में चर्चा करेंगे- आरटीआई से संबंधित कदम और प्रक्रियाएं क्या हैं? 

 

चरण 3 - समूह चर्चा 

  1. कहानियों के वितरण के बाद, विद्यार्थियों को समूह चर्चा के लिए अपने समूहों में बैठने के लिए कहें।
  2. विद्यार्थियों को सूचित करे कि समूह चर्चा का समय केवल 10 मिनट है।
  3. 10 मिनट के बाद प्रत्येक समूह को उन्हें दी गई कहानियों से आरटीआई के बारे में जो समझ में आया, उसे इस प्रकार प्रस्तुत करना है

कहानी 1 समूह- आरटीआई की सूचना और उसका उद्देश्य

कहानी 2 समूह- आरटीआई से संबंधित मुद्दे और परिणाम

कहानी 3 समूह- आरटीआई से संबंधित कदम और प्रक्रियाएं

चरण 4 – प्रस्तुति  

  1. समूह को उनके विषय के अनुसार उनकी प्रस्तुति के लिए लगभग 5-7 मिनट मिलेंगे|
  2. प्रत्येक प्रस्तुति के बाद अन्य समूह अपने सुझाव दे सकते हैं या प्रश्न पूछ सकते हैं।

 

चरण 5: सवाल-जवाब (डीब्रीफ) सत्र  

शिक्षकों से अनुरोध है कि वे सभी विद्यार्थियों के साथ एक सवाल-जवाब सत्र करें ताकि इससे वे यह समझने की कोशिश कर सके  

  1. आरटीआई के माध्यम से किस प्रकार की जानकारी का अनुरोध किया जा सकता है?
  2. सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सूचित नागरिक बनने में कैसे मदद करता है?
  3. आपको क्यों लगता है कि आरटीआई अधिनियम नागरिकों के लिए सशक्त है?
  4. आप कितने लोगों को आरटीआई अधिनियम के बारे में जागरूकता फैलाएंगे?

गृहकार्य (वैकल्पिक) 

आरटीआई आवेदन दाखिल करने के चरणों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें (अनुलग्नक देखें)। 

चरण 6: 

रिफ्लेक्शन शीट और फीडबैक फ़ार्म 

शिक्षक कृपया फीडबैक फॉर्म भरें और विद्यार्थियों को भी रिफ्लेक्शन शीट भरने के लिए याद दिलाएं। 

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